हाय Aavya। मैदान में सीटी बजी। कई बच्चे आगे निकल गए। Aavya की साँस तेज़ हो गई, घुटने भारी लगे। एक ख़याल आया, यहीं रुक जाऊँ, कोई देखेगा नहीं। क्यों रुकने का मन हुआ? क्योंकि आखिरी आने पर शर्म लगती है, और शर्म कदमों को छोटा कर देती है। Aavya ने किनारे देखा। अध्यापिका हाथ हिला रही थी, रुको मत। Aavya ने एक और कदम रखा। फिर एक। लाइन टूटी नहीं। आखिरी बच्चे के रूप में Aavya फीते के पार आया। साँस धौंकनी जैसी थी, पर मुँह हँस रहा था। अध्यापिका बोलीं, तुम रुके नहीं। Aavya, पहले आना एक खुशी है। आखिर तक पहुँचना दूसरी, और वह तुम्हारे पैरों में रहती है।
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कक्षा 2 की छोटी नैतिक कहानियाँ कौन सी हैं?
पेंसिल, टूटा गिलास, रोज़ पानी, एक छाता, धन्यवाद, दौड़, टिफिन और किताबें। हर कहानी छोटी है, कक्षा 2 के बच्चे के लिए।
छोटी नैतिक कहानियाँ बच्चों को क्या सिखाती हैं?
सच बोलना, आधा बाँटना, रोज़ थोड़ा काम करना, और मदद माँगना। एक घटना काफी है।
क्या बच्चे का नाम कहीं सेव होता है?
नहीं। नाम सिर्फ इसी पेज की कहानी में दिखता है और आवाज़ बनाने के लिए जाता है। यह लिंक, कुकी या रिकॉर्ड में नहीं रहता।