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टिफिन की कहानी

भूखे दोस्त के लिए आधी रोटी काफी दोपहर बनाती है।

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हाय Aavya। दोपहर को Aavya का डिब्बा खुला। दो पराँठे, थोड़ी सब्ज़ी। बगल में आरव का डिब्बा खाली जगह था। वह पेट पर हाथ रखे बैठा था। Aavya ने सोचा, दोनों पराँठे दे दूँ तो मैं भूखा रहूँगा। क्यों यह हल अधूरा था? क्योंकि पूरा दे देना एक को खिलाता है और दूसरे को खाली छोड़ता है। Aavya ने एक पराँठा बीच से तोड़ा। आधा आरव की तरफ़ सरकाया। सब्ज़ी भी दो चम्मच। दोनों ने खाया। आरव बोला, अब पेट शांत है। खेल की घंटी बजी तो दोनों एक साथ उठे। Aavya, आधी रोटी के बाद भी दोपहर पूरी होती है।

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