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गिरी हुई किताबों की कहानी

मदद माँगना और मदद करना, दोनों छोटी और ठीक बातें हैं।

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हाय Aavya। बैग का ज़िप खुला और किताबें गलियारे में फैल गईं। गणित नीचे, हिंदी ऊपर, एक पेंसिल और दूर। Aavya ने सोचा, मैं अकेला उठा लूँगा, किसी को बुलाना कमज़ोरी है। क्यों यह बात फिसली? क्योंकि एक हाथ से तीन किताबें संभलती नहीं। Aavya ने दो उठाईं, तीसरी फिर गिर गई। घंटी पास थी। तभी आरव रुका। उठाऊँ? Aavya ने हाँ कहा। यह छोटा शब्द मुश्किल लगा था, पर कह दिया। दोनों झुके। ढेर बना। ज़िप बंद। घंटी से पहले दोनों अपनी सीट पर थे। आरव बोला, मेरे बैग का ज़िप भी कभी खुलता है। Aavya, मदद माँगना और मदद करना, दोनों ठीक हैं।

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