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सुदामा की कहानी

दोस्त के पास बड़ा डिब्बा होना ज़रूरी नहीं। आना ही काफी है।

अगलीबारिश
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हाय Aavya। एक दोस्त बहुत दूर था। Aavya के हाथ में थोड़ा चावल था, कपड़े सादे। दरवाज़े के बाहर रुक गया। लगा, इतना छोटा उपहार ले जाऊँ तो दोस्त हँसेगा। क्यों यह बात अधूरी थी? क्योंकि दोस्ती डिब्बे का आकार नहीं मापती। Aavya कृष्ण के पास गया। कृष्ण दौड़कर गले लगे, हाथ में क्या है यह बाद में देखा। चावल काफी था। आना ही उपहार है। Aavya दरवाज़े के अंदर चला गया। Aavya, छोटे हाथ से भी दोस्त के पास जाया जाता है।

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