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शुभ रात्रि कृष्ण

यह कहानी यहीं खत्म होती है। इसके बाद नया खेल नहीं।

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हाय Aavya। दीया धीमा हो गया, और Aavya ने कहा, एक कहानी और, एक खेल और। दिन रुकने का नाम नहीं ले रहा था। क्यों? क्योंकि आखिरी कदम हार जैसा लगता है, पर वह हार नहीं है। Aavya कृष्ण के पास गया। कृष्ण करवट लेकर लेटे थे। शुभ रात्रि आखिरी कदम है। बाहर एक आखिरी घंटी बजी, फिर चुप्पी। सुबह फिर मिलेंगे। Aavya ने आँखें बंद कीं। Aavya, शुभ रात्रि। कहानी यहीं खत्म।

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