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बारी आने की कहानी

मेरी बारी अभी नहीं, यह कहना भी एक हुनर है।

अगलीसुदामा
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हाय Aavya। वृंदावन में एक झूला था। Aavya की बारी हो चुकी थी, दोस्त खड़ा था। Aavya नहीं उतरा। लगा, रुकूँगा तो बारी हमेशा के लिए चली जाएगी। क्यों यह डर अधूरा था? क्योंकि झूला एक बच्चे का नहीं होता। Aavya कृष्ण के पास गया। कृष्ण ने रस्सी थामी। तुम्हारी बारी हो गई। उसे बिठाओ। इंतज़ार हारना नहीं है। बारी लौटती है। Aavya उतरा और दोस्त को बैठाया। Aavya, रुकना हार नहीं। तुम्हारी बारी फिर आती है।

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