हाय Aavya। पूरी सुबह Aavya दरवाज़े पर रंग का पाउडर लेकर बैठा रहा। लाल, पीला, सफ़ेद। पंखुड़ी-पंखुड़ी करके एक बड़ी रंगोली बनी, सूरज जैसी गोल। तभी छोटा चिंटू नंगे पैर दौड़ता हुआ आया, सीधा बीच से। दो छोटे पैर, ठीक पीले रंग में। Aavya चिल्लाया, तुमने बिगाड़ दिया! चिंटू का होंठ काँपा, और वह रोने लगा। Aavya का चेहरा गरम था। पर फिर Aavya ने दोबारा देखा। पैरों के निशान छोटे और प्यारे थे, दरवाज़े की तरफ़ जाते हुए। दादी मुस्कुराईं और बोलीं, दिवाली पर हम घर के अंदर आते छोटे पैर बनाते हैं, लक्ष्मी माँ के लिए। Aavya ने चिंटू का हाथ पकड़ा। दोनों ने सफ़ेद पाउडर से और छोटे पैर बनाए, एक कदम, दो कदम, तीन कदम, अंदर तक। Aavya, कभी-कभी गलती ही तस्वीर का सबसे अच्छा हिस्सा बन जाती है।
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त्योहार पर बच्चों को कौन सी कहानी सुनाएँ?
जो त्योहार पास है, उसी से शुरू करें। अक्टूबर में दुर्गा पूजा और दशहरा, फिर दिवाली और भाई दूज।
ये कहानियाँ क्या सिखाती हैं?
भीड़ में खो जाने पर रुकना, डर लगे तो हाथ पकड़ना, जानवरों से नरमी, बाँटना, और पड़ोसियों के त्योहार में शामिल होना।
क्या बच्चे का नाम कहीं सेव होता है?
नहीं। नाम सिर्फ इसी पेज की कहानी में दिखता है और आवाज़ बनाने के लिए जाता है। यह लिंक, कुकी या रिकॉर्ड में नहीं रहता।