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रंगोली और छोटे पैरों के निशान

गलती भी डिज़ाइन का हिस्सा बन सकती है, अगर हम मिलकर उसे ठीक करें।

अगलीतिलक की थाली
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हाय Aavya। पूरी सुबह Aavya दरवाज़े पर रंग का पाउडर लेकर बैठा रहा। लाल, पीला, सफ़ेद। पंखुड़ी-पंखुड़ी करके एक बड़ी रंगोली बनी, सूरज जैसी गोल। तभी छोटा चिंटू नंगे पैर दौड़ता हुआ आया, सीधा बीच से। दो छोटे पैर, ठीक पीले रंग में। Aavya चिल्लाया, तुमने बिगाड़ दिया! चिंटू का होंठ काँपा, और वह रोने लगा। Aavya का चेहरा गरम था। पर फिर Aavya ने दोबारा देखा। पैरों के निशान छोटे और प्यारे थे, दरवाज़े की तरफ़ जाते हुए। दादी मुस्कुराईं और बोलीं, दिवाली पर हम घर के अंदर आते छोटे पैर बनाते हैं, लक्ष्मी माँ के लिए। Aavya ने चिंटू का हाथ पकड़ा। दोनों ने सफ़ेद पाउडर से और छोटे पैर बनाए, एक कदम, दो कदम, तीन कदम, अंदर तक। Aavya, कभी-कभी गलती ही तस्वीर का सबसे अच्छा हिस्सा बन जाती है।

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