हाय Aavya। दिवाली की रात गली दीयों से जगमग थी। फिर पटाखे शुरू हुए। धड़ाम! धड़ाम! मोती, भूरा गली का कुत्ता, स्कूटर के नीचे भागा और पूरा काँपने लगा, कान नीचे। Aavya का मन हुआ, मोती को बाहर खींचकर गले लगा ले। पर Aavya रुक गया। क्यों? क्योंकि डरा हुआ कुत्ता काट सकता है, दोस्त वाला भी। तो Aavya ने कटोरे में पानी भरा और धीरे से स्कूटर के पास सरका दिया। फिर Aavya सीढ़ी पर बैठा, ज़्यादा पास नहीं, और दादी ने एक छोटा दीया जलाने में मदद की। Aavya ने बड़े लड़कों से कहा, भैया, पटाखे गली के उस छोर पर फोड़ो? उन्होंने मोती को देखा और सिर हिलाया। धीरे-धीरे धमाके दूर चले गए। मोती ने पानी पिया, फिर अपनी नाक Aavya के जूते पर रख दी। Aavya, दिवाली रोशनी का त्योहार है। एक शांत दीया सबसे प्यारा तोहफ़ा हो सकता है।
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त्योहार पर बच्चों को कौन सी कहानी सुनाएँ?
जो त्योहार पास है, उसी से शुरू करें। अक्टूबर में दुर्गा पूजा और दशहरा, फिर दिवाली और भाई दूज।
ये कहानियाँ क्या सिखाती हैं?
भीड़ में खो जाने पर रुकना, डर लगे तो हाथ पकड़ना, जानवरों से नरमी, बाँटना, और पड़ोसियों के त्योहार में शामिल होना।
क्या बच्चे का नाम कहीं सेव होता है?
नहीं। नाम सिर्फ इसी पेज की कहानी में दिखता है और आवाज़ बनाने के लिए जाता है। यह लिंक, कुकी या रिकॉर्ड में नहीं रहता।