हाय Aavya। दशहरे की शाम मैदान लोगों से भरा था। बीच में काग़ज़ और बाँस का बड़ा रावण खड़ा था, घर जितना ऊँचा। राम छोटे से मंच पर आए और धनुष उठाया। फिर चटर-पटर हुई, और धमाका। Aavya ने दोनों हाथों से दोनों कान दबा लिए और पापा के पैर के पीछे छिप गया। सब हँस रहे हैं, Aavya ने सोचा, तो मुझे डर क्यों लग रहा है? पापा नीचे झुके। चलो पीछे पेड़ों के पास से देखें? दोनों हाथ पकड़कर पीछे चले गए। दूर से आग एक बड़े नारंगी फूल जैसी लगी, और धमाका बस एक हल्की आवाज़ रह गई। पापा बोले, राम इसलिए जीते क्योंकि मुश्किल में भी उन्होंने हार नहीं मानी। और तुम भी रुके रहे। Aavya, बहादुर होने का मतलब यह नहीं कि डर कभी न लगे। मतलब है, हाथ पकड़ो और साथ रहो।
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त्योहार पर बच्चों को कौन सी कहानी सुनाएँ?
जो त्योहार पास है, उसी से शुरू करें। अक्टूबर में दुर्गा पूजा और दशहरा, फिर दिवाली और भाई दूज।
ये कहानियाँ क्या सिखाती हैं?
भीड़ में खो जाने पर रुकना, डर लगे तो हाथ पकड़ना, जानवरों से नरमी, बाँटना, और पड़ोसियों के त्योहार में शामिल होना।
क्या बच्चे का नाम कहीं सेव होता है?
नहीं। नाम सिर्फ इसी पेज की कहानी में दिखता है और आवाज़ बनाने के लिए जाता है। यह लिंक, कुकी या रिकॉर्ड में नहीं रहता।