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दशहरे का बड़ा रावण

डर लगना ठीक है। बहादुरी का मतलब है अपनों के साथ रहना, दूर से ही सही।

अगलीमोती और शोर वाली रात
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हाय Aavya। दशहरे की शाम मैदान लोगों से भरा था। बीच में काग़ज़ और बाँस का बड़ा रावण खड़ा था, घर जितना ऊँचा। राम छोटे से मंच पर आए और धनुष उठाया। फिर चटर-पटर हुई, और धमाका। Aavya ने दोनों हाथों से दोनों कान दबा लिए और पापा के पैर के पीछे छिप गया। सब हँस रहे हैं, Aavya ने सोचा, तो मुझे डर क्यों लग रहा है? पापा नीचे झुके। चलो पीछे पेड़ों के पास से देखें? दोनों हाथ पकड़कर पीछे चले गए। दूर से आग एक बड़े नारंगी फूल जैसी लगी, और धमाका बस एक हल्की आवाज़ रह गई। पापा बोले, राम इसलिए जीते क्योंकि मुश्किल में भी उन्होंने हार नहीं मानी। और तुम भी रुके रहे। Aavya, बहादुर होने का मतलब यह नहीं कि डर कभी न लगे। मतलब है, हाथ पकड़ो और साथ रहो।

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