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भाई दूज और सबसे बड़ा लड्डू

एक-दूसरे का ख़याल दोनों तरफ़ से रखा जाता है। और बाँटा हुआ लड्डू ज़्यादा मीठा लगता है।

अगलीएक लंबी पंगत
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हाय Aavya। भाई दूज की सुबह Aavya ने थाली बहुत ध्यान से पकड़ी। रोली, चावल, एक छोटा दीया, और दो लड्डू, एक बड़ा और एक छोटा। दीदी ने छोटे चिंटू के माथे पर लाल तिलक लगाया, और ऊपर चावल के कुछ दाने चिपक गए। चिंटू खिलखिलाया। फिर मिठाई की बारी आई। Aavya ने बड़े लड्डू को देखा, और मुँह में पानी आ गया। Aavya ने सोचा, थाली तो मैंने पकड़ी, तो बड़ा मेरा। चिंटू ने दोनों हाथ उसकी तरफ़ बढ़ा दिए। दीदी बोलीं, आज हम एक-दूसरे का ख़याल रखने का वादा करते हैं। Aavya ने बड़े लड्डू के तीन टुकड़े किए, एक दीदी का, एक चिंटू का, एक Aavya का। चिंटू ने भरे मुँह से कहा, मैं भी तुम्हारा ख़याल रखूँगा। सब हँस पड़े। Aavya, ख़याल दोनों तरफ़ से रखा जाता है। और बाँटा हुआ लड्डू और भी मीठा लगता है।

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