हाय Aavya। भाई दूज की सुबह Aavya ने थाली बहुत ध्यान से पकड़ी। रोली, चावल, एक छोटा दीया, और दो लड्डू, एक बड़ा और एक छोटा। दीदी ने छोटे चिंटू के माथे पर लाल तिलक लगाया, और ऊपर चावल के कुछ दाने चिपक गए। चिंटू खिलखिलाया। फिर मिठाई की बारी आई। Aavya ने बड़े लड्डू को देखा, और मुँह में पानी आ गया। Aavya ने सोचा, थाली तो मैंने पकड़ी, तो बड़ा मेरा। चिंटू ने दोनों हाथ उसकी तरफ़ बढ़ा दिए। दीदी बोलीं, आज हम एक-दूसरे का ख़याल रखने का वादा करते हैं। Aavya ने बड़े लड्डू के तीन टुकड़े किए, एक दीदी का, एक चिंटू का, एक Aavya का। चिंटू ने भरे मुँह से कहा, मैं भी तुम्हारा ख़याल रखूँगा। सब हँस पड़े। Aavya, ख़याल दोनों तरफ़ से रखा जाता है। और बाँटा हुआ लड्डू और भी मीठा लगता है।
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त्योहार पर बच्चों को कौन सी कहानी सुनाएँ?
जो त्योहार पास है, उसी से शुरू करें। अक्टूबर में दुर्गा पूजा और दशहरा, फिर दिवाली और भाई दूज।
ये कहानियाँ क्या सिखाती हैं?
भीड़ में खो जाने पर रुकना, डर लगे तो हाथ पकड़ना, जानवरों से नरमी, बाँटना, और पड़ोसियों के त्योहार में शामिल होना।
क्या बच्चे का नाम कहीं सेव होता है?
नहीं। नाम सिर्फ इसी पेज की कहानी में दिखता है और आवाज़ बनाने के लिए जाता है। यह लिंक, कुकी या रिकॉर्ड में नहीं रहता।