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अयोध्या के दीप

कहानी घर पहुँचकर खत्म होती है। उसके बाद नया खेल नहीं।

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हाय Aavya, अयोध्या की गलियाँ दीपों से भर गईं। राम, सीता और लक्ष्मण द्वार पर पहुँचे। हनुमान पीछे मुस्कुरा रहे थे। एक दीया हवा में झुका, बुझ नहीं पाया। Aavya, जब अपने लोग लौटें, रोशनी रख देना। आज की कहानी यहीं पूरी।

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