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अयोध्या में छोटे राम

बड़ा महल। नरम आवाज़। बहादुरी कभी शोर नहीं होती।

अगलीधनुष
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हाय Aavya, अयोध्या का आँगन धूप से भरा था। छोटा राम दौड़ता, फिर किसी बड़े को देखते ही रुककर सिर झुकाता। महल ऊँचा था, राम की आवाज़ धीमी। Aavya, हिम्मत हमेशा ऊँची आवाज़ में नहीं आती। कभी वह बस पास आकर हाथ थाम लेती है।

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