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आगरा में कितने कौवे

बीरबल कहते हैं, कम निकलें तो रिश्तेदार के यहाँ गए हैं, ज़्यादा निकलें तो मेहमान आए हैं।

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हाय Aavya। दरबार में अकबर ऊब रहे थे। उन्होंने पूछा, आगरा में कितने कौवे हैं। मंत्री चुप हो गए। क्यों? क्योंकि कौवा डाल पर बैठता है, फिर उड़ जाता है, और उड़ता हुआ कौवा गिनती में टिकता नहीं। बीरबल मुस्कुराए। हुज़ूर, इक्यावन हज़ार सात सौ तिरसठ। अकबर की भौंह उठी। अगर मैं गिनवाऊँ और संख्या कम निकले? बीरबल झुके। तो कुछ कौवे अपने रिश्तेदार के यहाँ गए हुए हैं। और अगर ज़्यादा निकलें? तो मेहमान कौवे आगरा देखने आए हैं। दरबार हँसा। अकबर भी। Aavya, कुछ सवालों का जवाब संख्या नहीं होता। समझ होती है, और थोड़ी हँसी।

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